बुधवार, 14 अक्टूबर 2009

आज

सोमवार, 12 अक्टूबर 2009

रविवार, 11 अक्टूबर 2009

नरेगा

इस तरह की योजनायें कभी भी सफल नही हो सकती क्यूंकि इस तरह की योजनाओं को सफल बनाने के लिए जागरूकता की जरूरत है , आज गाँव गाँव में भ्रस्ताचार दीमक की तरह चिपक गया है , परन्तु जब विचार करते हैं तब हमें कहीं न कहीं इसकी जड़ में राजनीती ही नजर आती है / आज सभी राजनीतिक पार्टियों की इकाई के अंश पूरे देश में विधमान हैं ,और मैं समझता हूँ की कहीं न कहीं राजनीतिक पार्टियों की भ्रटाचार वाली शाखा इन इकाइयों में समाई हुई है /जिससे इमानदार आदमी भी दबाव में कार्य कर रहा है क्यूंकि साम दाम दंड भेद सभी कुछ आजमाया जा रहा है /
सबसे पहले हमे करना यह है , सभी ग्राम प्रधानों को ग्राम प्रधान बन कर कार्य करना होगा न की किसी पार्टी के प्रतिनिधि की तरह इसके लिए उन अधिकारीयों को भी जवाब देह बनाना होगा जो गाँव की तरकी के लिए .....................शेष

गुरुवार, 16 अप्रैल 2009

कविता

नेताओं को देख कर वोटर हुआ उदास
भ्रस्ताचारी सारें हैं नही किसी से आस
भूख और मज़बूरी मैं देते सारे वोट
फ़िर भी नही है कोई नेता करता सपोट
अभिनेता भी नेता बनकर मांगे है वोट
पिक्चर उनकी देख कर जनता लोट पोट
इसी भावना मैं बहकर सारे डालें वोट
मनोरंजन के बदले लेते हैं ये वोट
इन्हें टिकट देकर के नेता नही मनाते सोक
पक्की इनकी जीत समझ कर हो जाते हैं मौन
बेवकूफ बनती है जनता
देकर इनको वोट
फिर पिकचर मैं आ जाते हैं
करने लोट पोट ..............सार
धन्यबाद

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

किसान

भारत में किसानो की दुर्दसा निरंतर होती जा रही है ,इसका उत्तरदायित्व भारत के राजनीती पर बहुत बुरा असर पडेगा ,आज टेक्नोलॉजी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है ,जबकि पेट भरने के लिए अन्न जरुरी है ,जब भारत सोने की चिडिया कहलाता था ,तब भारत में अन्न भंडार भरे हुए थे ,आज देश में एक अरब की आबादी में कुछ चंदसरकारी कर्मचारी हैं (निम्न से निम्न )जिनकी आए सालाना १/२ से १० लाख के करीब है ,जिनके लिए पे कमीसन तथा महगाई भत्ता लागु किया जाता है ,परन्तु किसानो के लिए कुछ नही सिर्फ़ कागजी खाना पूर्ति यह सब को पता है ! नेताओं को तो महज २ -३ करोड़ सरकारी कर्म चारी के वोट चाहिए जो डालने भी नही जाते एसी में सोते हैं ,सरकार गरीबों व् किसानो के बल पैर बनती है जिनकी उपेच्चा भुगतनी पडेगी !

गुरुवार, 9 अप्रैल 2009

किसान

अभी तक चुनाओ प्रचार में किसी भी नेता ने चाहे वह राष्ट्रीय पार्टी हो या राज्यीय पार्टी किसानो की बेहतरी के लिए कोई जिक्र नही किया ,क्या देश की एक अरब आबादी का पेट पालने वाले किसानो की कोई अहमियत नही है , सोचो यदि किसान स्वयं का पेट भरने के लिए अन्न उपजाए , सरकारी कर्मचारी की तरह हरताल कर दे तब देश की जनता क्या खायेगी ,आज केंद्रीय कर्मचारी ४० लाख के करीब है तथा इतने ही रिटायर कर्मचारी होंगे ,सभी राज्य के कर्मचारी लगभग करोड़ होगें तो कुल मिलकर लगभग करोड़ लोग जो किसी किसी रूप में सरकार पर आश्रित हैं , इन लोगों को सरकार के पास से बिना किसी प्रकार का धन निवेश किए / लाख से १२ लाख तक सालाना प्राप्त होते हैं , जबकि किसानो को धन निवेश के बाद भी पेट भरने के लाले पर हैं ,उनके लिए तो कई पे कमीशन है ही महगाई भत्ता जबकि ८० % जनता (वोटर ) ग्राम में निवास करती है ,क्या विभिन्न पार्टियों को करोड़ कर्मचारी व् कुछ व्यापारी व् दूसरे अन्य कार्य करने वालों के वोट पाकर विजय प्राप्त कर लेते हैं

मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

प्रचार

आज चुनाओ प्रचार का तरीका बिल्कुल बदल चुका है , चुनाओ प्रचार का मतलब होता है की जनता को बताएं या जनता तक अपना संदेश पहुचाये जिस मकसद के लिए वे चयनित होना चाहते है ,तथा जनता व् देश की सेवा करना चाहते हैं परन्तु आज इसथित बिल्कुल विपरीत है ,वे सिर्फ़ एक दूसरे की बुराइयाँ गिनने में लगे रहते है ,जैसे वे सब दूध के धुले हैं ,


इस प्रकार जीतने के बाद संसद में पहुँचने पैर वहां भी पाच साल तक आरोप प्रत्यारोप में समय निकल देते हैं व् जनता की मेहनत की कमी खर्च कर देते हैं ।


प्रचार में इतने घटिया सब्दों का प्रयोग करते हैं तथा परिहास करते हैं व् जनता का मनोरंजन करके उन्हें मुर्ख बनते हैइस सब से क्या हासिल होगा क्या जनता को मूर्ख समझ रखा है


मेरा सुझाओ


नेताजी को बताना चाहिए की मैंने क्या क्या कार्य किए थे और क्या करना चाहता हूँ समाज के लिए ,देश के लिए ,विकास के लिए ,किसान के लिए ,विज्ञानं के लिए ,ज्ञान के लिए ,तथा सारे जहाँ के लिए ! तथा यदि विपक्च मैं बैठा तो क्या करवाऊंगा उपरोक्त के लिए .............!

प्रचार

चुनाव


आज देश में भ्रस्टाचार चरम पे है भारत में शायद ही इसमे सुधार हो सके और सुधर तभी होगा जब जनता जागरूक होगी तथा इसके साथ साथ नेताजी भी जागरूक हो तथा देश प्रेम की भावना तथा के संविधान के प्रति निष्ठां प्रबल होगी , तथा राजनेतिक पार्टियां ऐसे लोगों को टिकट दें ! यदि भ्रस्त लोगो को टिकट देंगे तो जनता की मज़बूरी होगी की वोट किसको दें
अगर यह सोंचकर वोट नही देंगे की नेता भ्रस्त है , तो उन लोगों के कुछ मात्र वोट पाकर जीत जायेंगे जो जनता जागरूक नही है.
मेरा सुझाओ
कुछ ऐसा कानून बने जिससे उमीदवार के लिए एक डिग्री होनी चाहिए जो अनिवार्य हो तथा कोई भी केश या उनके खिलाफ कहीं भी मुकदमा नही होना चाहिए तथा पुलिश के साथ साथ फिसिकल वैरीफिकेसन भी होना चाहिए , जैसे सरकारी कर्म चारी के लिए होता है तथा चुनाओ जीतने के एक वर्ष बाद ,जनता द्वारा कार्य की समीक्षा हो तथा वोटिंग की जाए , नाकाबिल को हटाया जाए !
धन्यवाद