गुरुवार, 16 अप्रैल 2009

कविता

नेताओं को देख कर वोटर हुआ उदास
भ्रस्ताचारी सारें हैं नही किसी से आस
भूख और मज़बूरी मैं देते सारे वोट
फ़िर भी नही है कोई नेता करता सपोट
अभिनेता भी नेता बनकर मांगे है वोट
पिक्चर उनकी देख कर जनता लोट पोट
इसी भावना मैं बहकर सारे डालें वोट
मनोरंजन के बदले लेते हैं ये वोट
इन्हें टिकट देकर के नेता नही मनाते सोक
पक्की इनकी जीत समझ कर हो जाते हैं मौन
बेवकूफ बनती है जनता
देकर इनको वोट
फिर पिकचर मैं आ जाते हैं
करने लोट पोट ..............सार
धन्यबाद

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