शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009
किसान
भारत में किसानो की दुर्दसा निरंतर होती जा रही है ,इसका उत्तरदायित्व भारत के राजनीती पर बहुत बुरा असर पडेगा ,आज टेक्नोलॉजी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है ,जबकि पेट भरने के लिए अन्न जरुरी है ,जब भारत सोने की चिडिया कहलाता था ,तब भारत में अन्न भंडार भरे हुए थे ,आज देश में एक अरब की आबादी में कुछ चंदसरकारी कर्मचारी हैं (निम्न से निम्न )जिनकी आए सालाना १/२ से १० लाख के करीब है ,जिनके लिए पे कमीसन तथा महगाई भत्ता लागु किया जाता है ,परन्तु किसानो के लिए कुछ नही सिर्फ़ कागजी खाना पूर्ति यह सब को पता है ! नेताओं को तो महज २ -३ करोड़ सरकारी कर्म चारी के वोट चाहिए जो डालने भी नही जाते एसी में सोते हैं ,सरकार गरीबों व् किसानो के बल पैर बनती है जिनकी उपेच्चा भुगतनी पडेगी !
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