अभी तक चुनाओ प्रचार में किसी भी नेता ने चाहे वह राष्ट्रीय पार्टी हो या राज्यीय पार्टी किसानो की बेहतरी के लिए कोई जिक्र नही किया ,क्या देश की एक अरब आबादी का पेट पालने वाले किसानो की कोई अहमियत नही है , सोचो यदि किसान स्वयं का पेट भरने के लिए अन्न उपजाए , सरकारी कर्मचारी की तरह हरताल कर दे तब देश की जनता क्या खायेगी ,आज केंद्रीय कर्मचारी ४० लाख के करीब है तथा इतने ही रिटायर कर्मचारी होंगे ,सभी राज्य के कर्मचारी लगभग २ करोड़ होगें तो कुल मिलकर लगभग ३ करोड़ लोग जो किसी न किसी रूप में सरकार पर आश्रित हैं , इन लोगों को सरकार के पास से बिना किसी प्रकार का धन निवेश किए १/२ लाख से १२ लाख तक सालाना प्राप्त होते हैं , जबकि किसानो को धन निवेश के बाद भी पेट भरने के लाले पर हैं ,उनके लिए न तो कई पे कमीशन है न ही महगाई भत्ता जबकि ८० % जनता (वोटर ) ग्राम में निवास करती है ,क्या विभिन्न पार्टियों को ३ करोड़ कर्मचारी व् कुछ व्यापारी व् दूसरे अन्य कार्य करने वालों के वोट पाकर विजय प्राप्त कर लेते हैं
गुरुवार, 9 अप्रैल 2009
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