घेरे में किरण बेदी, ओम पुरी
सांसदों ने दोनों सदनों में दिए विशेषाधिकार हनन के नोटिस
सांसदों ने दोनों सदनों में दिए विशेषाधिकार हनन के नोटिस
टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी और बॉलीवुड अभिनेता ओमपुरी को रामलीला मैदान में गांधीवादी अन्ना हजारे के समर्थन में नेताओं के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया है। अभद्र टिप्पणियों से नाराज सांसदों ने दोनों के खिलाफ सोमवार को संसद में विशेषाधिकार हनन के नोटिस दिए हैं। अब इनसे जवाब तलब किया जाएगा।
क्या कभी संसद की मर्यादा भंग करने व अमर्यादित टिप्पड़ी , मेज-कुर्सी-माइक फेकने पर कभी जनता को सांसदों के खिलाफ जनता द्वारा चुनी गई संसद का अपमान करने पर विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाया गया । अब इतनी मिर्ची क्यूँ लग रही है , जब किसी कक्षा में पीछे की कुर्सियों पर बैठे हुए विद्यार्थी कोई उत्तर नहीं दे पाते हैं, चल रही पढाई के दौरान मतलब नहीं रखते है । तब ऐसे विद्यार्थियों को भोंधू ,बुद्धू, गवांर न जाने क्या क्या कहा जाता है ऐसे शिष्य को कक्षा से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है । वैसे देश लोगों को पता है चुनाव के दौरान क्या क्या होता है ।
‘राइट टु रिकॉल’ पर अलग-अलग राय
कांग्रेस ने मुद्दे को अव्यवहारिक बताया, भाजपा इसके पक्ष में माकपा बोली, हम पहले से करते आ रहे हैं इस बारे में मांग
ऐसे कानून बनाने पर थोड़ी परेशानी जरूर होगी पर कुछ सालों में सब कुछ पटरी पर आ जायेगा जब अच्छे , इमानदार , पढ़े लिखे लोग चुन कर संसद व विधान सभा में आएंगे जबकि राज्य सभा व विधान परिषद् में पहले ही दिमाग दार लोग बैठे हैं । जो जनता द्वारा नहीं चुने जाते ।
अब अन्ना का अशर दिखने लगा है , लोगो में जाग्रति आई है अपने हक़ और मनवाने के अहिंसक तरीके जान गए हैं ,अब तस्वीर बदलने वाली है ।
क्या कभी संसद की मर्यादा भंग करने व अमर्यादित टिप्पड़ी , मेज-कुर्सी-माइक फेकने पर कभी जनता को सांसदों के खिलाफ जनता द्वारा चुनी गई संसद का अपमान करने पर विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाया गया । अब इतनी मिर्ची क्यूँ लग रही है , जब किसी कक्षा में पीछे की कुर्सियों पर बैठे हुए विद्यार्थी कोई उत्तर नहीं दे पाते हैं, चल रही पढाई के दौरान मतलब नहीं रखते है । तब ऐसे विद्यार्थियों को भोंधू ,बुद्धू, गवांर न जाने क्या क्या कहा जाता है ऐसे शिष्य को कक्षा से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है । वैसे देश लोगों को पता है चुनाव के दौरान क्या क्या होता है ।
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ऐसे कानून बनाने पर थोड़ी परेशानी जरूर होगी पर कुछ सालों में सब कुछ पटरी पर आ जायेगा जब अच्छे , इमानदार , पढ़े लिखे लोग चुन कर संसद व विधान सभा में आएंगे जबकि राज्य सभा व विधान परिषद् में पहले ही दिमाग दार लोग बैठे हैं । जो जनता द्वारा नहीं चुने जाते ।
अब अन्ना का अशर दिखने लगा है , लोगो में जाग्रति आई है अपने हक़ और मनवाने के अहिंसक तरीके जान गए हैं ,अब तस्वीर बदलने वाली है ।