बुधवार, 17 मार्च 2010

Bikhare Moti

कुछ भी ठीक नहीं है, देश के अंदर जो भी हो रहा है वह अनिष्ट की आशंका उत्पन्न कर रहा है आज इन्शान पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार है,क्या पैसा ही जीवन का उद्देश्य बन गया है ! क्या प्राचीन परम्पराएं , इतिहास, तथा महान उपलब्धियां विलुप्त हो गईं, क्या ऋषि मुनियों के देश मे सब कुछ धन के लिए होता था, यदि धन के लिए होता तब आज हम व् हमारी सभ्यता विलुप्त हो गई होती, विश्व के अधिकांश देशों की सभ्यताएं विलुप्त हो चुकीं तथा जिन देशों पर आज भी वह राज कर रहें हैं , तथा वहां का मूल निवासी विलुप्त प्राय हो गया तथा प्रतीक भी नहीं बचा क्यूंकि वहां भारत जैसी आत्माओं ने जन्म नहीं लिया था ...........शेष