गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

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आज जिनके पास किसी भी प्रकार की पहुँच होती है वह जीवन में तरक्की शीध्र कर लेता है, तथा सुखी जीवन जीता है उसके पास ज्ञान की चाहे जितनी कमी हो परन्तु एक बार जब वह किसी मकसद के लिए चुन लिया जाता है तो उसे उस कार्य का महारथी मान लिया जाता है किसी को नहीं पता होता  है उसके रहस्यों के बारे में न ही कोई जानने की कोशिश करता है फिर लोग उसे उसके पद व् व्यवसाये से ही जानते हैं पहचानते है वह वहां तक कैसे पंहुचा कोई जानने की कोशिश भी नहीं करता यदि किसी को पता भी होता है, तो वह सोंचता है क्यों किसी के पेट पर लात मारें लकिन वे भूल जाते हैं की उसने भी किसी का हक़ छीना है, ऐसे नाकाबिल लोग यदि किसी संगठन या देश या संस्था को चलायें गे तो समाज व् देश का क्या होगा, आज बहुत सारे कानून बने हुए हैं परन्तु उनका पालन नहीं हो रहा, कागजी खाना पूर्ति तो ऐसे होती है जैसे सब कुछ साफ सुथरा इमानदारी से कार्य हो रहा है, आज जो जितनी जानी मानी सर्वोच्च संस्था है  चाहे वह देश की शिक्षा संस्था हो या अन्य क्यूंकि इनके नाम को सुनकर लोग अभिभूत हो जाते हैं,जैसे किसी की सुंदर काया को देखकर उसके अंदर के अवगुणों को भूल जाते हैं , बस यहीं वो धोखा खा जाते हैं जब की वहां पर भ्रस्टाचार चरम पर है उपलब्धियां गिनाई जाती है लेकिन ये उपलब्धियां जाती कहाँ हैं इनका होता क्या है यह लूग भूल जाते है जाँच भी यदि की जाये तो भी नहीं हो सकती बुद्धिमान को पराजित करना ही कठिन कार्य है कुल मिलकर लूट घसोट मची है जनता अपना पेट पाले यह या इनकी बुराइयाँ गिनाये उसके पास भी समय नहीं है पर कुछ लोगों के चक्कर में दिग्भ्रमित रहती है पर भ्रस्टाचार चरम पर है ..................... इस पर सोंचने की जरूरत है
धन्यवाद

मंगलवार, 30 मार्च 2010

ट्राफिक

ट्राफिक की समस्या विकट रूप धारण करती जा रही है, आज महानगरों का विस्तार तेजी से होता  जा रहा है, गाँव से जनता शहरों की ओर पलायन कर रही है उसकी  भी कोई वजह है ! परन्तु सरकार   का कार्य है सुविधाएँ देना पर ऐसा नहीं हो पा रहा है , प्रति दिन धटनाएं हो रही हैं ,औरतें विधवा हो रही हैं, बच्चे अनाथ हो रहे है, किसी का पूरा परिवार तहस नहस हो रहा है , दूसरी समस्या जाम की है , ओवेरब्रिज बनाने के लिए पिछले दस सालों से ( कानपुर ) पैसा पास होता है ,अखवारों में रोज खबरें छपती हैं दस ओवेरब्रिज  बनेगे,  दो बाई पास निकलेंगे , circle lane बनेगें मगर चुनाव बाद सब ख़त्म बांकी टीका टिप्पड़ी होती रहती है बाद में बोलते हैं उनकी सरकार ने नहीं क्या ,मैंने पैसा पास करवाया किन्तु लोग मरते हैं तो मरने दें  हमारी गाड़ी सुरक्षित निकल  जाती है,  जनता को इतनी समझ कहाँ ................क्या होगा इस देश का जब एक शहर का विकाश नहीं कर सकते तो देश का विकाश  क्या करेंगें  ...........