शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009
किसान
गुरुवार, 9 अप्रैल 2009
किसान
मंगलवार, 7 अप्रैल 2009
प्रचार
आज चुनाओ प्रचार का तरीका बिल्कुल बदल चुका है , चुनाओ प्रचार का मतलब होता है की जनता को बताएं या जनता तक अपना संदेश पहुचाये जिस मकसद के लिए वे चयनित होना चाहते है ,तथा जनता व् देश की सेवा करना चाहते हैं परन्तु आज इसथित बिल्कुल विपरीत है ,वे सिर्फ़ एक दूसरे की बुराइयाँ गिनने में लगे रहते है ,जैसे वे सब दूध के धुले हैं ,
इस प्रकार जीतने के बाद संसद में पहुँचने पैर वहां भी पाच साल तक आरोप प्रत्यारोप में समय निकल देते हैं व् जनता की मेहनत की कमी खर्च कर देते हैं ।
प्रचार में इतने घटिया सब्दों का प्रयोग करते हैं तथा परिहास करते हैं व् जनता का मनोरंजन करके उन्हें मुर्ख बनते हैइस सब से क्या हासिल होगा क्या जनता को मूर्ख समझ रखा है
मेरा सुझाओ
नेताजी को बताना चाहिए की मैंने क्या क्या कार्य किए थे और क्या करना चाहता हूँ समाज के लिए ,देश के लिए ,विकास के लिए ,किसान के लिए ,विज्ञानं के लिए ,ज्ञान के लिए ,तथा सारे जहाँ के लिए ! तथा यदि विपक्च मैं बैठा तो क्या करवाऊंगा उपरोक्त के लिए .............!
चुनाव
आज देश में भ्रस्टाचार चरम पे है भारत में शायद ही इसमे सुधार हो सके और सुधर तभी होगा जब जनता जागरूक होगी तथा इसके साथ साथ नेताजी भी जागरूक हो तथा देश प्रेम की भावना तथा के संविधान के प्रति निष्ठां प्रबल होगी , तथा राजनेतिक पार्टियां ऐसे लोगों को टिकट दें ! यदि भ्रस्त लोगो को टिकट देंगे तो जनता की मज़बूरी होगी की वोट किसको दें
अगर यह सोंचकर वोट नही देंगे की नेता भ्रस्त है , तो उन लोगों के कुछ मात्र वोट पाकर जीत जायेंगे जो जनता जागरूक नही है.
मेरा सुझाओ
कुछ ऐसा कानून बने जिससे उमीदवार के लिए एक डिग्री होनी चाहिए जो अनिवार्य हो तथा कोई भी केश या उनके खिलाफ कहीं भी मुकदमा नही होना चाहिए तथा पुलिश के साथ साथ फिसिकल वैरीफिकेसन भी होना चाहिए , जैसे सरकारी कर्म चारी के लिए होता है तथा चुनाओ जीतने के एक वर्ष बाद ,जनता द्वारा कार्य की समीक्षा हो तथा वोटिंग की जाए , नाकाबिल को हटाया जाए !
धन्यवाद