इस तरह की योजनायें कभी भी सफल नही हो सकती क्यूंकि इस तरह की योजनाओं को सफल बनाने के लिए जागरूकता की जरूरत है , आज गाँव गाँव में भ्रस्ताचार दीमक की तरह चिपक गया है , परन्तु जब विचार करते हैं तब हमें कहीं न कहीं इसकी जड़ में राजनीती ही नजर आती है / आज सभी राजनीतिक पार्टियों की इकाई के अंश पूरे देश में विधमान हैं ,और मैं समझता हूँ की कहीं न कहीं राजनीतिक पार्टियों की भ्रटाचार वाली शाखा इन इकाइयों में समाई हुई है /जिससे इमानदार आदमी भी दबाव में कार्य कर रहा है क्यूंकि साम दाम दंड भेद सभी कुछ आजमाया जा रहा है /
सबसे पहले हमे करना यह है , सभी ग्राम प्रधानों को ग्राम प्रधान बन कर कार्य करना होगा न की किसी पार्टी के प्रतिनिधि की तरह इसके लिए उन अधिकारीयों को भी जवाब देह बनाना होगा जो गाँव की तरकी के लिए .....................शेष
रविवार, 11 अक्टूबर 2009
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