कैबिनेट के इस फैसले से 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियोंको लाभ होगा।महंगाई पर लगाम लगाने में नाकाम हो रही सरकार को उम्मीद है कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों को बढ़ती कीमतों से राहत दिलाने में कुछ मददगार साबित होगा।
मगर भारत की ८० फीसदी जनता के बारे में कौन सोंचेगा । पेट्रोल के साथ साथ सभी चीजों के दाम बाद जायेंगे इससे बांकी लोगों को राहत कैसे मिलेगी ।
कांग्रेस क्या एक दो करोड़ लोगों के बारे में ही सोंचती है, जिन्हें ये अपना कर्मचारी कहती है इनके पेट में जो भोजन जाता है उसमे किसान -मजदूर का पसीना मिला होता है ।
बार बार DA बढाने व टैक्स लेने से अच्छा होगा यदि यही पेट्रोल में सब्जिडी बड़ा देते तब सबका भला होता । मगर जनता को बेवकूफ समझा जाता है चुनाव आते आते कोई नया सिगूफा छोड़ देगें , लुहावने सपने दिखा देंगे फिर सत्ता में आ जायेंगे , मगर अब ऐसा नहीं होगा ।
मुझे लगता है ओमपुरी साहब सही बोल रहे थे , इस सरकार में जो मंत्री है शायद उनके पास दिमाग नहीं है खोखले लोग बैठे हैं। ये सरकार चलाना भी नहीं जानते , अपने आप को जरूरत से ज्यादा माननीय भी समझते हैं ।
हर मोर्चे पर फेल हैं शिक्षा , रक्षा , विदेश ,व्येपार , प्रसाशन ..... अरे हटो यार कुर्सी छोड़ो ... यदि सरकार प्राइवेट होती तो ऐसे मैनेजरों को नौकरी से निकाल देते, एक मिनट भी बर्दास्त नहीं करते ।
व्यापार व सीमाओं पर चाइना का कब्ज़ा धीरे धीरे बढता जा रहा है और ये कहते हैं ऐसा कुछ नहीं है । ये कांग्रेस सरकार चाहती है की एक सुई भी यही चाहिए तो चाइना से मंगा लो , बे वजह किसी चीज की फैक्ट्री खोलने से क्या फायदा जब बना बनाया मिल रहा हो , कच्चा माल हमसे लो और पका पकाया लो ।
ज्यादा कुछ लिखने से फायदा भी क्या जनता सब जानती है पिछले दिनों जो भी घटनाएँ घटी उससे पता चलता है पर सरकार (कांग्रेस) सोंचती है हमारे सिवा कोई विकल्प नहीं है इसलिए जनता की मजबूरी का पीड़ा उठाया जाये , दूसरी तरफ शिक्षा को इतना महगा कर दिया जाये जिससे जमीन के लोग ऊपर न उठ संके , पढ़ लिख न संके एक उंच-नीच , अमीर -गरीब व साम्प्रदायिकता की खाई बनी रहे और आगे भी पचास साल तक राज करते रहें ।
मगर भारत की ८० फीसदी जनता के बारे में कौन सोंचेगा । पेट्रोल के साथ साथ सभी चीजों के दाम बाद जायेंगे इससे बांकी लोगों को राहत कैसे मिलेगी ।
कांग्रेस क्या एक दो करोड़ लोगों के बारे में ही सोंचती है, जिन्हें ये अपना कर्मचारी कहती है इनके पेट में जो भोजन जाता है उसमे किसान -मजदूर का पसीना मिला होता है ।
बार बार DA बढाने व टैक्स लेने से अच्छा होगा यदि यही पेट्रोल में सब्जिडी बड़ा देते तब सबका भला होता । मगर जनता को बेवकूफ समझा जाता है चुनाव आते आते कोई नया सिगूफा छोड़ देगें , लुहावने सपने दिखा देंगे फिर सत्ता में आ जायेंगे , मगर अब ऐसा नहीं होगा ।
मुझे लगता है ओमपुरी साहब सही बोल रहे थे , इस सरकार में जो मंत्री है शायद उनके पास दिमाग नहीं है खोखले लोग बैठे हैं। ये सरकार चलाना भी नहीं जानते , अपने आप को जरूरत से ज्यादा माननीय भी समझते हैं ।
हर मोर्चे पर फेल हैं शिक्षा , रक्षा , विदेश ,व्येपार , प्रसाशन ..... अरे हटो यार कुर्सी छोड़ो ... यदि सरकार प्राइवेट होती तो ऐसे मैनेजरों को नौकरी से निकाल देते, एक मिनट भी बर्दास्त नहीं करते ।
व्यापार व सीमाओं पर चाइना का कब्ज़ा धीरे धीरे बढता जा रहा है और ये कहते हैं ऐसा कुछ नहीं है । ये कांग्रेस सरकार चाहती है की एक सुई भी यही चाहिए तो चाइना से मंगा लो , बे वजह किसी चीज की फैक्ट्री खोलने से क्या फायदा जब बना बनाया मिल रहा हो , कच्चा माल हमसे लो और पका पकाया लो ।
ज्यादा कुछ लिखने से फायदा भी क्या जनता सब जानती है पिछले दिनों जो भी घटनाएँ घटी उससे पता चलता है पर सरकार (कांग्रेस) सोंचती है हमारे सिवा कोई विकल्प नहीं है इसलिए जनता की मजबूरी का पीड़ा उठाया जाये , दूसरी तरफ शिक्षा को इतना महगा कर दिया जाये जिससे जमीन के लोग ऊपर न उठ संके , पढ़ लिख न संके एक उंच-नीच , अमीर -गरीब व साम्प्रदायिकता की खाई बनी रहे और आगे भी पचास साल तक राज करते रहें ।
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